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श्लोक  6.42.60 
स्वभावजेन कौन्तेय निबद्ध: स्वेन कर्मणा ।
कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत् ॥ ६० ॥
 
 
अनुवाद
इस समय तुम आसक्ति के कारण मेरे आदेशानुसार कार्य करने से इनकार कर रहे हो। किन्तु हे कुन्तीपुत्र! तुम अपने स्वभावजनित कर्म से विवश होकर यह सब करोगे।
 
At this time, due to attachment, you are refusing to act according to my instructions. But, O son of Kunti, you will do all the same, being compelled by the action generated by your own nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)