Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.42.54: इस प्रकार, जो दिव्य पद में स्थित है, वह तत्काल ही परब्रह्म को प्राप्त कर लेता है और पूर्ण सुखी हो जाता है। वह न तो शोक करता है, न किसी वस्तु की इच्छा करता है। वह सभी प्राणियों के साथ समान व्यवहार करता है। उस अवस्था में, वह मेरी शुद्ध भक्ति को प्राप्त करता है। | mahabharat अध्याय 6.42: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18: संन्यास योग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मभूत: प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति ।
सम: सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम् ॥ ५४ ॥
अनुवाद
इस प्रकार, जो दिव्य पद में स्थित है, वह तत्काल ही परब्रह्म को प्राप्त कर लेता है और पूर्ण सुखी हो जाता है। वह न तो शोक करता है, न किसी वस्तु की इच्छा करता है। वह सभी प्राणियों के साथ समान व्यवहार करता है। उस अवस्था में, वह मेरी शुद्ध भक्ति को प्राप्त करता है।
Thus, one who is situated in the divine position immediately realizes the Supreme Brahman and becomes completely happy. He neither grieves nor desires anything. He treats every living being equally. In that state, he attains my pure devotion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥