Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.42.5: यज्ञ, दान और तप के कर्मों का कभी त्याग नहीं करना चाहिए, उन्हें अवश्य करना चाहिए। निस्संदेह, यज्ञ, दान और तप महात्माओं को भी पवित्र कर देते हैं। | mahabharat अध्याय 6.42: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18: संन्यास योग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यज्ञदानतप:कर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत् ।
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम् ॥ ५ ॥
अनुवाद
यज्ञ, दान और तप के कर्मों का कभी त्याग नहीं करना चाहिए, उन्हें अवश्य करना चाहिए। निस्संदेह, यज्ञ, दान और तप महात्माओं को भी पवित्र कर देते हैं।
The acts of sacrifice, charity and austerity should never be abandoned, they must be performed. Undoubtedly, sacrifice, charity and austerity purify even the great souls.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥