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श्लोक  6.42.46 
यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् ।
स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानव: ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
जो भगवान सभी प्राणियों के मूल हैं और सर्वव्यापी हैं, उनकी पूजा करके मनुष्य अपने कर्तव्यों का पालन करने में पूर्णता प्राप्त कर सकता है।
 
By worshiping the Lord who is the origin of all beings and is omnipresent, a human being can achieve perfection in performing his duties.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)