श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 42: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 18: संन्यास योग  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.42.43 
शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम् ।
दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
वीरता, बल, दृढ़ संकल्प, कौशल, युद्ध में धैर्य, उदारता और नेतृत्व - ये क्षत्रियों के स्वाभाविक गुण हैं।
 
Valour, strength, determination, skill, fortitude in battle, generosity and leadership—these are the natural qualities of Kshatriyas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)