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प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये ।
बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धि: सा पार्थ सात्त्विकी ॥ ३० ॥
अनुवाद
हे पृथापुत्र! वह बुद्धि सत्वगुण की है, जिसके द्वारा मनुष्य जानता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं, किससे डरना चाहिए और किससे नहीं, कौन सी बात बाँधती है और कौन सी बात मुक्त करती है।
O son of Pritha! That intelligence is of the Satva Guna by which a man knows what is to be done and what is not, whom to fear and whom not to fear, what binds and what liberates.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥