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त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिण: ।
यज्ञदानतप:कर्म न त्याज्यमिति चापरे ॥ ३ ॥
अनुवाद
कुछ विद्वान सभी प्रकार के सकाम कर्मों को दोषपूर्ण मानते हुए उनका त्याग कर देना चाहिए, लेकिन कुछ विद्वानों का मानना है कि यज्ञ, दान और तप जैसे कर्मों का कभी त्याग नहीं करना चाहिए।
Some scholars declare that all types of Sakaam Karma should be abandoned as faulty. But other scholars believe that the acts of Yajna, charity and austerity should never be abandoned.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥