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श्लोक  6.42.29 
बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं श‍ृणु ।
प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनञ्जय ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
हे धनंजय! अब मैं तुम्हें प्रकृति के तीन गुणों के अनुसार बुद्धि और धैर्य के विभिन्न प्रकारों के विषय में विस्तारपूर्वक बताता हूँ। इसे सुनो।
 
O Dhananjaya! Now I will tell you in detail about the different types of intelligence and patience according to the three qualities of nature. Listen to this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)