मुक्तसङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वित: ।
सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकार: कर्ता सात्त्विक उच्यते ॥ २६ ॥
अनुवाद
जो व्यक्ति भौतिक गुणों से आसक्ति रहित, अहंकार रहित, दृढ़ संकल्प और उत्साह के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करता है तथा सफलता या असफलता से अविचलित रहता है, उसे सात्विक कर्ता कहा जाता है।
A person who performs his duties without any attachment to material qualities, without any ego, with determination and enthusiasm and remains unperturbed by success or failure is called a Sattvika doer.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥