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श्लोक  6.42.23 
नियतं सङ्गरहितमरागद्वेषत: कृतम् ।
अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विकमुच्यते ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
जो कर्म नियमित रूप से किया जाता है और फल की इच्छा के बिना, बिना किसी राग, द्वेष या भावना के किया जाता है, उसे सात्विक कहते हैं।
 
The action which is regular and is performed without any desire for the fruit of the action, without any attachment, passion or hatred, is called Sattvika.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)