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यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहैतुकम् ।
अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम् ॥ २२ ॥
अनुवाद
और जिस ज्ञान के द्वारा मनुष्य एक ही प्रकार के कर्म को, जो अत्यन्त तुच्छ है, सब कुछ मानकर, सत्य को न जानकर, उसमें प्रवृत्त होता है, वह तामसी कहलाता है।
And that knowledge by which a man indulges in one type of activity, which is very trivial, considering it to be everything, without knowing the truth, is called Tamasi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥