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श्लोक  6.42.21 
पृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं नानाभावान्पृथग्विधान् ।
वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ज्ञानं विद्धि राजसम् ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
जिस ज्ञान के द्वारा मनुष्य भिन्न-भिन्न शरीरों में भिन्न-भिन्न प्रकार के प्राणियों को देखता है, वह तुम्हें राजसी ज्ञान जानिये।
 
The knowledge by which a man sees different kinds of living beings in different bodies should be known to you as royal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)