Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.42.16: इसलिए, जो इन पांच कारणों की उपेक्षा करता है और स्वयं को एकमात्र कर्ता मानता है, वह निश्चित रूप से बहुत बुद्धिमान नहीं है और चीजों को सही तरीके से नहीं देख सकता है। | mahabharat अध्याय 6.42: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18: संन्यास योग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु य: ।
पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मति: ॥ १६ ॥
अनुवाद
इसलिए, जो इन पांच कारणों की उपेक्षा करता है और स्वयं को एकमात्र कर्ता मानता है, वह निश्चित रूप से बहुत बुद्धिमान नहीं है और चीजों को सही तरीके से नहीं देख सकता है।
Therefore, he who ignores these five causes and believes himself to be the only doer is certainly not very intelligent and cannot see things in the right way.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥