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श्लोक  6.42.14 
अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम् ।
विविधाश्च पृथक्‍चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
कर्म का स्थान (शरीर), कर्ता, विभिन्न इन्द्रियाँ, विभिन्न प्रकार की चेष्टाएँ और ईश्वर - ये कर्म के पाँच कारण हैं।
 
The place of action (body), the doer, the various senses, various types of efforts and God – these are the five causes of karma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)