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श्लोक  6.41.20 
दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे ।
देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम् ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
जो दान कर्तव्य समझकर, बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के, सही समय, स्थान और सही व्यक्ति को दिया जाता है, उसे सात्विक माना जाता है।
 
The charity which is given as a duty, without expecting anything in return, at the right time and place and to the right person, is considered Sattvik.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)