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mahabharat 6.41.17: ये तीन प्रकार की तपस्याएँ, जो भौतिक लाभ की इच्छा न रखने वाले तथा केवल भगवान के प्रति समर्पित लोगों द्वारा दिव्य श्रद्धा के साथ की जाती हैं, सात्विक तपस्या कहलाती हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.41: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 17: श्रद्धा के विभाग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.41.17 
श्रद्धया परया तप्‍तं तपस्तत्‍त्रिविधं नरै: ।
अफलाकाङ्‌‍क्षिभिर्युक्तै: सात्त्विकं परिचक्षते ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
ये तीन प्रकार की तपस्याएँ, जो भौतिक लाभ की इच्छा न रखने वाले तथा केवल भगवान के प्रति समर्पित लोगों द्वारा दिव्य श्रद्धा के साथ की जाती हैं, सात्विक तपस्या कहलाती हैं।
 
These three types of austerities, performed with divine faith by people who do not desire material gain and are devoted only to God, are called Sattvika austerities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)