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mahabharat 6.41.14: परमात्मा, ब्राह्मण, गुरु, माता-पिता आदि बड़ों की पूजा करना तथा पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा का पालन करना शारीरिक तपस्या है।   |   mahabharat अध्याय 6.41: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 17: श्रद्धा के विभाग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.41.14 
देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम् ।
ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
परमात्मा, ब्राह्मण, गुरु, माता-पिता आदि बड़ों की पूजा करना तथा पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा का पालन करना शारीरिक तपस्या है।
 
Worshiping the Supreme Being, Brahmans, Guru, elders like parents and purity, simplicity, celibacy and non-violence are physical austerities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)