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श्लोक  6.40.7 
प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च जना न विदुरासुरा: ।
न शौचं नापि चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जो लोग आसुरी प्रवृत्ति के हैं, वे यह नहीं जानते कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। उनमें न तो पवित्रता होती है, न उचित आचरण, न सत्य।
 
Those who are demoniac do not know what should be done and what should not be done. Neither purity, nor proper conduct, nor truth is found in them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)