| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 40: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16: दैवी तथा आसुरी स्वभाव » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 6.40.23  | य: शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारत: ।
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम् ॥ २३ ॥ | | | | | | अनुवाद | | जो मनुष्य शास्त्रों के आदेशों की अवहेलना करता है और मनमाना आचरण करता है, उसे न तो सफलता मिलती है, न सुख और न ही परम मोक्ष। | | | | He who disregards the injunctions of the scriptures and acts arbitrarily, attains neither success, nor happiness, nor ultimate salvation. | | ✨ ai-generated | | |
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