Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.40.22: हे कुन्तीपुत्र! जो मनुष्य इन तीनों नरक के द्वारों से बच निकलता है, वह आत्म-साक्षात्कार के लिए शुभ कर्म करता है और इस प्रकार धीरे-धीरे परम मोक्ष को प्राप्त करता है। | mahabharat अध्याय 6.40: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16: दैवी तथा आसुरी स्वभाव । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कुन्तीपुत्र! जो मनुष्य इन तीनों नरक के द्वारों से बच निकलता है, वह आत्म-साक्षात्कार के लिए शुभ कर्म करता है और इस प्रकार धीरे-धीरे परम मोक्ष को प्राप्त करता है।
O son of Kunti! The person who escapes from these three gates of hell performs auspicious acts for self-realization and thus gradually attains the ultimate salvation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥