|
| |
| |
श्लोक 6.40.21  |
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मन: ।
काम: क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ॥ २१ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| इस नरक के तीन द्वार हैं - काम, क्रोध और लोभ। प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को इनका त्याग कर देना चाहिए क्योंकि ये आत्मा के पतन का कारण बनते हैं। |
| |
| There are three gates to this hell- lust, anger and greed. Every intelligent person should give up these because they lead to the downfall of the soul. |
| ✨ ai-generated |
| |
|