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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 40: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16: दैवी तथा आसुरी स्वभाव
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श्लोक 20
श्लोक
6.40.20
आसुरीं योनिमापन्ना मूढा जन्मनि जन्मनि ।
मामप्राप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गतिम् ॥ २० ॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! ऐसे मनुष्य बार-बार राक्षस योनियों में जन्म लेते हुए कभी भी मुझ तक नहीं पहुँच पाते। वे धीरे-धीरे अत्यंत क्षीण गति को प्राप्त होते हैं।
O son of Kunti! Such persons, being born again and again in demonic forms, are never able to reach Me. They gradually attain very low speed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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