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अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिता: ।
मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयका: ॥ १८ ॥
अनुवाद
मिथ्या अहंकार, शक्ति, गर्व, वासना और क्रोध से मोहित होकर राक्षसी व्यक्ति अपने शरीर में तथा दूसरों के शरीर में भगवान से ईर्ष्या करते हैं और वास्तविक धर्म की आलोचना करते हैं।
Deluded by false ego, power, pride, lust and anger, demonic persons become jealous of the Lord in their own body and in the bodies of others and criticize real religion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥