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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 40: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16: दैवी तथा आसुरी स्वभाव
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श्लोक 16
श्लोक
6.40.16
अनेकचित्तविभ्रान्ता मोहजालसमावृता: ।
प्रसक्ता: कामभोगेषु पतन्ति नरकेऽशुचौ ॥ १६ ॥
अनुवाद
इस प्रकार अनेक चिंताओं से व्याकुल होकर तथा मोह के जाल में बंध कर वे विषय-भोगों में अत्यधिक आसक्त हो जाते हैं और नरक में गिरते हैं।
Thus, troubled with many anxieties and bound in the web of illusion, they become excessively attached to sensual pleasures and fall into hell.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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