Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.40.10: अतृप्त न होने वाली कामवासना का आश्रय लेकर तथा अहंकार और मिथ्या प्रतिष्ठा में डूबे हुए आसुरी लोग इस प्रकार मोहग्रस्त होकर क्षणभंगुर पदार्थों की सहायता से सदैव अपवित्र कर्मों में लगे रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.40: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 16: दैवी तथा आसुरी स्वभाव   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 40: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 16: दैवी तथा आसुरी स्वभाव  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.40.10 
काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विता: ।
मोहाद्‍गृहीत्वासद्‍ग्राहान्प्रवर्तन्तेऽश‍ुचिव्रता: ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
अतृप्त न होने वाली कामवासना का आश्रय लेकर तथा अहंकार और मिथ्या प्रतिष्ठा में डूबे हुए आसुरी लोग इस प्रकार मोहग्रस्त होकर क्षणभंगुर पदार्थों की सहायता से सदैव अपवित्र कर्मों में लगे रहते हैं।
 
Taking refuge in lust which never satisfies, and being drowned in the arrogance of pride and false prestige, the demoniacs, being thus bewildered, are always engaged in unholy acts with the help of ephemeral things.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)