श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 4: धृतराष्ट्रके पूछनेपर संजयके द्वारा भूमिके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.4.9 
संजय उवाच
यथाप्रज्ञं महाप्राज्ञ भौमान् वक्ष्यामि ते गुणान्।
शास्त्रचक्षुरवेक्षस्व नमस्ते भरतर्षभ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- महाप्रज्ञ! मैं अपनी बुद्धि के अनुसार आपसे इस भूमिका के गुणों का वर्णन करूँगा। भरतश्रेष्ठ! आपको नमस्कार है; आप इस विषय को शास्त्रों की दृष्टि से देखें और समझें।
 
Sanjay said – Mahapragya! I will describe the qualities of this role to you according to my wisdom. Bharatshrestha! Greetings to you; You should look at this topic from the scriptures and understand it. 9॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas