श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 4: धृतराष्ट्रके पूछनेपर संजयके द्वारा भूमिके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.4.7 
देशानां च परीमाणं नगराणां च संजय।
श्रोतुमिच्छामि तत्त्वेन यत एते समागता:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘संजय! मैं तुमसे उन देशों और नगरों का वास्तविक आकार सुनना चाहता हूँ जहाँ से ये लोग आये हैं।॥ 7॥
 
‘Sanjay! I wish to hear from you the true size of the countries and cities from where these people have come.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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