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mahabharat 6.4.21: जिसके अधीन भूमि है, उसके अधीन सम्पूर्ण चराचर जगत् है, इसीलिए भूमि में आसक्त राजा एक-दूसरे को मार डालते हैं ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 6.4: धृतराष्ट्रके पूछनेपर संजयके द्वारा भूमिके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 4: धृतराष्ट्रके पूछनेपर संजयके द्वारा भूमिके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.4.21 
यस्य भूमिस्तस्य सर्वं जगत् स्थावरजङ्गमम्।
तत्रातिगृद्धा राजानो विनिघ्नन्तीतरेतरम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जिसके अधीन भूमि है, उसके अधीन सम्पूर्ण चराचर जगत् है, इसीलिए भूमि में आसक्त राजा एक-दूसरे को मार डालते हैं ॥21॥
 
The one who has land under his control has the entire grazing world under his control, that is why kings who are attached to land kill each other. 21॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वणि भौमगुणकथने चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वमें भूमिगुणवर्णनविषयक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)