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श्लोक  6.4.2 
स मुहूर्तमिव ध्यात्वा विनि:श्वस्य मुहुर्मुहु:।
संजयं संशितात्मानमपृच्छद् भरतर्षभ॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! कुछ देर तक विचार करके और बार-बार गहरी साँस लेकर उन्होंने शुद्ध हृदय वाले संजय से पूछा-॥2॥
 
O best of the Bharatas! After thinking for a while and taking deep breaths again and again, he asked the pure hearted Sanjaya -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)