श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 4: धृतराष्ट्रके पूछनेपर संजयके द्वारा भूमिके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.4.14 
उद्भिज्जा: स्थावरा: प्रोक्तास्तेषां पञ्चैव जातय:।
वृक्षगुल्मलतावल्‍ल्‍लस्त्वक्सारास्तृणजातय:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
स्थावर प्राणियों को उद्भिज्ज कहते हैं। वे पाँच ही प्रकार के होते हैं - वृक्ष, झाड़ी, लता, लता और त्वकसार (बाँस आदि)। ये सब तृण श्रेणी के हैं॥14॥
 
The immobile beings are called Udbhijja. They are of only five kinds- tree, shrub, creeper, creeper and Twaksaar (bamboo etc.). All these are species of grass category.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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