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mahabharat 6.4.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! महर्षि व्यास बुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र से ऐसा कहकर चले गए। उनके पूर्वोक्त वचन सुनकर धृतराष्ट्र भी कुछ देर तक उन पर विचार करते रहे॥1॥   |   mahabharat अध्याय 6.4: धृतराष्ट्रके पूछनेपर संजयके द्वारा भूमिके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 4: धृतराष्ट्रके पूछनेपर संजयके द्वारा भूमिके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.4.1 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा ययौ व्यासो धृतराष्ट्राय धीमते।
धॄतराष्ट्रोऽपि तच्छ्रुत्वा ध्यानमेवान्वपद्यत॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! महर्षि व्यास बुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र से ऐसा कहकर चले गए। उनके पूर्वोक्त वचन सुनकर धृतराष्ट्र भी कुछ देर तक उन पर विचार करते रहे॥1॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Maharishi Vyasa left after saying this to the wise king Dhritarashtra. After hearing his aforesaid words, Dhritarashtra also kept pondering over them for some time.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)