इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ ।
एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ॥ २० ॥
अनुवाद
हे अनघ! यह वैदिक शास्त्रों का अत्यन्त गोपनीय भाग है, जिसे मैंने अब प्रकट किया है। जो इसे समझ लेगा, वह ज्ञानी हो जाएगा और उसके प्रयत्न सफल होंगे।
O Anagha! This is the most secret portion of the Vedic scriptures, which I have now revealed. Whoever understands this will become wise and his endeavors will be successful.
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे पुरुषोत्तमयोगो नाम पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥ भीष्मपर्वणि तु एकोनचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्गीतोपनिषद्, श्रीकृष्णार्जुनसंवादमें पुरुषोत्तमयोग नामक पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥ भीष्मपर्वमें उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥