श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 39: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.39.14 
अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रित: ।
प्राणापानसमायुक्त: पचाम्यन्नं चतुर्विधम् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
मैं समस्त प्राणियों के शरीर में पाचक अग्नि (वैश्वानर) हूँ और मैं श्वास-प्रश्वास (प्राण वायु) में स्थित होकर चारों प्रकार के अन्नों का पाचन करता हूँ।
 
I am the digestive fire (Vaishvanara) in the bodies of all living beings and I digest the four kinds of grains by residing in the inhalation and exhalation (prana vayu).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)