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श्रीभगवानुवाच
ऊर्ध्वमूलमध:शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् ।
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ॥ १ ॥
अनुवाद
भगवान बोले- ऐसा कहा जाता है कि एक सनातन अश्वत्थ वृक्ष है, जिसकी जड़ें ऊपर की ओर, शाखाएँ नीचे की ओर हैं और जिसके पत्ते वैदिक ऋचाएँ हैं। जो इस वृक्ष को जानता है, वही वेदों का ज्ञाता है।
Bhagavan said- It is said that there is an eternal Ashwattha tree, whose roots are upwards and branches are downwards and the leaves are Vedic hymns. One who knows this tree is the knower of the Vedas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥