vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 38: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14: प्रकृति के तीन गुण
»
श्लोक 17
श्लोक
6.38.17
सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च ।
प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च ॥ १७ ॥
अनुवाद
सच्चा ज्ञान सत्व गुण से उत्पन्न होता है, लोभ रजो गुण से उत्पन्न होता है और अज्ञान, प्रमाद और मोह तमो गुण से उत्पन्न होते हैं।
True knowledge arises from Satva Guna, greed arises from Rajo Guna and ignorance, negligence and delusion arise from Tamo Guna.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas