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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 38: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14: प्रकृति के तीन गुण
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श्लोक 17
श्लोक
6.38.17
सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च ।
प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च ॥ १७ ॥
अनुवाद
सच्चा ज्ञान सत्व गुण से उत्पन्न होता है, लोभ रजो गुण से उत्पन्न होता है और अज्ञान, प्रमाद और मोह तमो गुण से उत्पन्न होते हैं।
True knowledge arises from Satva Guna, greed arises from Rajo Guna and ignorance, negligence and delusion arise from Tamo Guna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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