Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.37.31: जब कोई विवेकशील व्यक्ति विभिन्न भौतिक शरीरों के कारण उत्पन्न विभिन्न अभिव्यक्तियों को देखना बंद कर देता है, तथा यह देख लेता है कि जीवात्माएँ किस प्रकार सर्वत्र फैली हुई हैं, तो उसे ब्रह्म साक्षात्कार प्राप्त हो जाता है। | mahabharat अध्याय 6.37: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति ।
तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा ॥ ३१ ॥
अनुवाद
जब कोई विवेकशील व्यक्ति विभिन्न भौतिक शरीरों के कारण उत्पन्न विभिन्न अभिव्यक्तियों को देखना बंद कर देता है, तथा यह देख लेता है कि जीवात्माएँ किस प्रकार सर्वत्र फैली हुई हैं, तो उसे ब्रह्म साक्षात्कार प्राप्त हो जाता है।
When a discerning person stops seeing different manifestations due to different material bodies, and sees how the living entities are spread everywhere, he attains Brahman realization.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥