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mahabharat 6.37.30: जो यह देखता है कि सभी कर्म प्रकृति से उत्पन्न शरीर द्वारा ही किये जाते हैं और जो यह देखता है कि आत्मा कुछ भी नहीं करती, वही सत्य को देखता है।   |   mahabharat अध्याय 6.37: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 37: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.37.30 
प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वश: ।
य: पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
जो यह देखता है कि सभी कर्म प्रकृति से उत्पन्न शरीर द्वारा ही किये जाते हैं और जो यह देखता है कि आत्मा कुछ भी नहीं करती, वही सत्य को देखता है।
 
He who sees that all actions are performed by the body, which has originated from nature, and who sees that the soul does nothing, he sees the truth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)