Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.37.19: इस प्रकार मैंने कर्मक्षेत्र (शरीर), ज्ञान और ज्ञेय का संक्षेप में वर्णन किया है। केवल मेरे भक्त ही इसे पूर्णतः समझकर मेरे स्वरूप को प्राप्त कर सकते हैं। | mahabharat अध्याय 6.37: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासत: ।
मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते ॥ १९ ॥
अनुवाद
इस प्रकार मैंने कर्मक्षेत्र (शरीर), ज्ञान और ज्ञेय का संक्षेप में वर्णन किया है। केवल मेरे भक्त ही इसे पूर्णतः समझकर मेरे स्वरूप को प्राप्त कर सकते हैं।
Thus I have briefly described the field of action (body), knowledge and the knowable. Only my devotees can understand this completely and thus attain my nature.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥