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mahabharat 6.37.13: अब मैं तुम्हें ज्ञेय के विषय में बताता हूँ, जिसे जानकर तुम शाश्वत ब्रह्म का आस्वादन कर सकोगे। यह ब्रह्म या आत्मा, जो शाश्वत है और मेरे अधीन है, इस भौतिक जगत के कार्य-कारण से परे है।   |   mahabharat अध्याय 6.37: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 37: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.37.13 
ज्ञेयं यत्तत्प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वामृतमश्न‍ुते ।
अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
अब मैं तुम्हें ज्ञेय के विषय में बताता हूँ, जिसे जानकर तुम शाश्वत ब्रह्म का आस्वादन कर सकोगे। यह ब्रह्म या आत्मा, जो शाश्वत है और मेरे अधीन है, इस भौतिक जगत के कार्य-कारण से परे है।
 
Now I shall tell you about the knowable, by knowing which you will be able to taste the eternal Brahman. This Brahman or Atman, which is eternal and is under my control, is beyond the cause and effect of this material world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)