श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 36: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 12: भक्तियोग  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.36.9 
अथ चित्तं समाधातुं न शक्न‍ोषि मयि स्थिरम् ।
अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्‍तुं धनञ्जय ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन, हे धनंजय! यदि तुम मुझमें अनन्य भक्ति से मन नहीं लगा सकते, तो तुम्हें भक्तियोग के नियमों का पालन करना चाहिए। इस प्रकार मुझे प्राप्त करने की इच्छा उत्पन्न करनी चाहिए।
 
O Arjuna, O Dhananjaya! If you cannot fix your mind on me with unwavering devotion, then you should follow the rules and regulations of Bhakti Yoga. In this way you should develop the desire to attain me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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