ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि सन्न्यस्य मत्परा: ।
अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते ॥ ६ ॥
तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात् ।
भवामि न चिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम् ॥ ७ ॥
अनुवाद
हे पार्थ, जो लोग अपने समस्त कर्मों को मुझमें अर्पण करके अनन्य भक्ति से मेरी पूजा करते हैं, मुझमें मन लगाते हैं और निरन्तर मेरा ध्यान करते हैं, हे पार्थ, मैं उन्हें जन्म-मृत्यु के सागर से शीघ्र ही मुक्ति देने वाला हूँ।
To those who surrender all their activities to Me and worship Me with unwavering devotion, and fix their minds on Me and constantly meditate on Me, O Partha, I am the speedy deliverer from the ocean of birth and death.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥