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श्रीभगवानुवाच
मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते ।
श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मता: ॥ २ ॥
अनुवाद
श्री भगवान बोले:--जो लोग मेरे भौतिक रूप में अपने मन को एकाग्र करते हैं, और सदैव अत्यंत भक्ति के साथ मेरी पूजा में लगे रहते हैं, उन्हें मैं परम सिद्ध मानता हूँ।
Sri Bhagavan said:--Those who concentrate their minds on My physical form, and are always engaged in worshipping Me with utmost devotion, are considered by Me to be supremely accomplished.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥