Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.36.16: जो मेरा भक्त साधारण कर्मों पर आश्रित नहीं है, जो शुद्ध है, कार्यकुशल है, चिंताओं से मुक्त है, सभी कष्टों से मुक्त है तथा जो किसी फल की इच्छा नहीं करता, वह मुझे अत्यंत प्रिय है। | mahabharat अध्याय 6.36: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12: भक्तियोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनपेक्ष: शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथ: ।
सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्त: स मे प्रिय: ॥ १६ ॥
अनुवाद
जो मेरा भक्त साधारण कर्मों पर आश्रित नहीं है, जो शुद्ध है, कार्यकुशल है, चिंताओं से मुक्त है, सभी कष्टों से मुक्त है तथा जो किसी फल की इच्छा नहीं करता, वह मुझे अत्यंत प्रिय है।
A devotee of Mine who is not dependent on ordinary activities, who is pure, efficient, free from worries, free from all sufferings and who does not strive for any result, is extremely dear to Me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥