श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.35.50 
सञ्जय उवाच
इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा
स्वकं रूपं दर्शयामास भूय: ।
आश्वासयामास च भीतमेनं
भूत्वा पुन: सौम्यवपुर्महात्मा ॥ ५० ॥
 
 
अनुवाद
संजय ने धृतराष्ट्र से कहा - अर्जुन से ऐसा कहकर भगवान श्रीकृष्ण ने अपना वास्तविक चतुर्भुज रूप प्रकट किया और अंत में भयभीत अर्जुन को शांत करने के लिए अपना द्विभुज रूप दिखाया।
 
Sanjaya said to Dhritarashtra - After saying this to Arjuna, Lord Krishna revealed His real Chaturbhuj (four-armed) form and finally showed His two-armed form to pacify the frightened Arjuna.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd