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mahabharat 6.35.46: हे विशाल रूप! हे सहस्त्रबाहु प्रभु! मैं आपके मुकुटधारी चतुर्भुज रूप को देखना चाहता हूँ, जिसमें आप अपने चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण किए हुए हैं। मैं उसी रूप को देखना चाहता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.35.46 
किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त-
मिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव ।
तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन
सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
हे विशाल रूप! हे सहस्त्रबाहु प्रभु! मैं आपके मुकुटधारी चतुर्भुज रूप को देखना चाहता हूँ, जिसमें आप अपने चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण किए हुए हैं। मैं उसी रूप को देखना चाहता हूँ।
 
O huge form! O thousand-armed Lord! I want to see your crowned four-armed form, in which you are holding a conch, a wheel, a mace and a lotus in your four hands. I desire to see that very form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)