Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.35.4: हे प्रभु! हे योगेश्वर! यदि आप सोचते हैं कि मैं आपके विराट रूप को देखने में समर्थ हूँ, तो कृपया मुझे अपना अनंत विराट रूप दिखाइए।   |   mahabharat अध्याय 6.35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.35.4 
मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो ।
योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे योगेश्वर! यदि आप सोचते हैं कि मैं आपके विराट रूप को देखने में समर्थ हूँ, तो कृपया मुझे अपना अनंत विराट रूप दिखाइए।
 
O Lord! O Yogeshwara! If you think that I am capable of seeing your cosmic form, then kindly show me your infinite cosmic form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)