Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.35.38: आप इस ब्रह्माण्ड के आदिदेव, शाश्वत पुरुष और परम आश्रय हैं। आप सब कुछ जानते हैं और जो कुछ भी जानने योग्य है, वह आप ही हैं। आप भौतिक गुणों से परे परम आश्रय हैं। हे अनंत स्वरूप! यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आपसे व्याप्त है। | mahabharat अध्याय 6.35: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11: विराट रूप । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वमादिदेव: पुरुष: पुराण-
स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् ।
वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम
त्वया ततं विश्वमनन्तरूप ॥ ३८ ॥
अनुवाद
आप इस ब्रह्माण्ड के आदिदेव, शाश्वत पुरुष और परम आश्रय हैं। आप सब कुछ जानते हैं और जो कुछ भी जानने योग्य है, वह आप ही हैं। आप भौतिक गुणों से परे परम आश्रय हैं। हे अनंत स्वरूप! यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आपसे व्याप्त है।
You are the primal deity, the eternal person and the ultimate shelter of this cosmic manifestation. You know everything and you are everything that is to be known. You are the ultimate shelter beyond the material qualities. O infinite form! This entire cosmic manifestation is pervaded by you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥