Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.35.37: हे महात्मा! आप ब्रह्मा से भी महान हैं, आप आदि सृष्टिकर्ता हैं। फिर लोग आपको सादर प्रणाम क्यों न करें? हे अनंत, हे देव, हे ब्रह्मांड के धाम! आप परम स्रोत हैं, अपरिवर्तनशील हैं, समस्त कारणों के कारण हैं और इस भौतिक जगत से परे हैं। | mahabharat अध्याय 6.35: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11: विराट रूप । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन्
गरीयसे ब्रह्मणोऽप्यादिकर्त्रे ।
अनन्त देवेश जगन्निवास
त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत् ॥ ३७ ॥
अनुवाद
हे महात्मा! आप ब्रह्मा से भी महान हैं, आप आदि सृष्टिकर्ता हैं। फिर लोग आपको सादर प्रणाम क्यों न करें? हे अनंत, हे देव, हे ब्रह्मांड के धाम! आप परम स्रोत हैं, अपरिवर्तनशील हैं, समस्त कारणों के कारण हैं और इस भौतिक जगत से परे हैं।
O Mahatma! You are greater than even Brahma, you are the original creator. Then why should they not offer their respectful obeisances unto you? O Anant, O Deva, O abode of the universe! You are the ultimate source, the immutable, the cause of all causes and beyond this material world.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥