Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.35.31: हे देवेश्वर! कृपा करके मुझे बताइए कि आप इस भयंकर रूप में कौन हैं? मैं आपको प्रणाम करता हूँ, कृपया मुझ पर प्रसन्न हों। आप आदिदेव हैं। मैं आपको जानना चाहता हूँ, क्योंकि मैं यह नहीं जान पा रहा हूँ कि आपका प्रयोजन क्या है। | mahabharat अध्याय 6.35: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11: विराट रूप । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो
नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद ।
विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं
न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम् ॥ ३१ ॥
अनुवाद
हे देवेश्वर! कृपा करके मुझे बताइए कि आप इस भयंकर रूप में कौन हैं? मैं आपको प्रणाम करता हूँ, कृपया मुझ पर प्रसन्न हों। आप आदिदेव हैं। मैं आपको जानना चाहता हूँ, क्योंकि मैं यह नहीं जान पा रहा हूँ कि आपका प्रयोजन क्या है।
O Deveshwar! Kindly tell me who you are in such a fierce form? I bow to you, kindly be pleased with me. You are the original God. I want to know you, because I am not able to know what your purpose is.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥