श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.35.28 
यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगा:
समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति ।
तथा तवामी नरलोकवीरा
विशन्ति वक्‍त्राण्यभिविज्‍वलन्ति ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
जैसे नदियों की अनेक लहरें समुद्र में प्रवेश करती हैं, वैसे ही ये सभी महारथी आपके प्रज्वलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं।
 
Just as the many waves of rivers enter the ocean, so are all these great warriors entering your blazing mouths.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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